10 साल की कानूनी लड़ाई रंग लाई: माउंट कार्मल स्कूल की मनमानी फीस वृद्धि पर कोर्ट की रोक

10 साल की कानूनी लड़ाई रंग लाई: माउंट कार्मल स्कूल की मनमानी फीस वृद्धि पर कोर्ट की रोक

1000230429

A 10-year legal battle has paid off

चंडीगढ़:  शहर के सेक्टर-47 स्थित माउंट कार्मल स्कूल द्वारा वर्ष 2017-18 में की गई भारी फीस बढ़ोतरी को जिला अदालत ने अवैध करार देते हुए 349 अभिभावकों को बड़ी राहत प्रदान की है। करीब एक दशक तक चले कानूनी संघर्ष के बाद आए इस फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया है कि निजी स्कूल एक शैक्षणिक सत्र में अधिकतम आठ प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकते हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि स्कूल द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक फीस वसूलना नियमों के खिलाफ है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि कोई अभिभावक बढ़ी हुई फीस का भुगतान नहीं करता है तो स्कूल उसके बच्चे का दाखिला रोकने या किसी प्रकार की प्रतिकूल कार्रवाई करने का अधिकार नहीं रखता।
मामला फरवरी 2017 का है, जब अभिभावकों को पेरेंट्स-टीचर मीटिंग के दौरान नोटिस बोर्ड पर नई फीस संरचना की जानकारी मिली। आरोप था कि नर्सरी से 12वीं तक की मासिक ट्यूशन फीस, जो लगभग 2700 रुपये थी, उसे बढ़ाकर 4800 से 4975 रुपये तक कर दिया गया। अभिभावकों ने इसे मनमाना और गैरकानूनी बताते हुए विरोध शुरू किया तथा बाद में “माउंट कार्मल पेरेंट्स एसोसिएशन” का गठन कर अदालत का दरवाजा खटखटाया।
स्कूल प्रबंधन ने अदालत में दलील दी कि वह एक गैर-सहायता प्राप्त निजी संस्थान है और फीस निर्धारण उसका अधिकार है। स्कूल ने यह भी कहा कि बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा डेवलपमेंट फीस, वार्षिक शुल्क और अन्य खर्चों में किया गया था ताकि बेहतर सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया जा सके।
हालांकि अदालत ने अभिभावकों के पक्ष को स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया कि वर्ष 2017-18 से लागू की गई फीस वृद्धि नियमों के अनुरूप नहीं थी। अब अभिभावक केवल आठ प्रतिशत तक बढ़ी हुई फीस देने के लिए बाध्य होंगे। यह फैसला चंडीगढ़ के निजी स्कूलों में फीस नियमन को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।